Wastewater characteristics क्या है?

नमस्कार दोस्तों आज का हमारा topic waste water characteristics है। यह topic का relevance civil engineering के environment engineering subject से है तो चलिए बिना कोई समय waste किये हम अपना topic शुरू करते हैं।

Waste water क्या है?

हम सब जानते हैं कि पानी हमारे जीवन मे कितना important है बिना पानी के जीवन की कल्पना करना नामुमकिन है, हम अपने जीवन मे हर छोटे बड़े दैनिक कार्यो को पूरे करने के लिए पानी पर आश्रित है फिर चाहे वो घर पर खाना बनाना हो या गाड़ी धोना। हमारे काम करने के बाद जब पानी खराब हो जाता है और वो हमारी और utility को पूरा न करने वाला पानी ही waste water है, इसमे bathroom से निकला पानी,kitchen से निकला पानी ,बारिश का पानी आदि सम्मलित हैं।

Waste water को हमने industrial waste water जो कि industry से निकलता है और municipal waste water जो कि घरो से निकलता है में categorized किया है।Industry से निकलने वाला पानी की quality अलग होती है और municipal waste के पानी की quality अलग तो हमे दोनों को मिलाके dilution करके एक साथ municipal sewer से drain करते हैं। हमारे यह ज्यादातर ऐसे municipal sewer को river में openly खोल दिया जाता है जिससे sewer का गंदा पानी river के साफ पानी से मिलकर dilute हो जाता है।अगर हम waste water को बिना treat किये ही river में dispose करेगे तो aquatic ecosystem पर बुरा असर पड़ेगा और जिससे वहाँ पर fishes ओर अन्य aquatic animal की death हो सकती है तो government ने कुछ standard decide किये हैं हर तरह की contaminants की अगर आपके effluent में उनकी मात्रा standard rate से कम है तो आप इसे नदी में dispose कर सकते हैं जिससे वह पर aquatic wild life affect न हो।

Physical characteristics

  • Turbidity

Waste water normally turbid ही होता है और इसके turbid होने का कारण पानी का गंदा होना है जिनमे गंदगी baths, toilet, pieces of paper, greases, vegetable debris, fruit skins  आदि से आती है।

  • Colour

Waste water के colour को हम naked eye से देख सकते हैं और ये waste water की age बताता है।

Fresh waste water usually grey or light brown colour का होता है जबकि organic compoundsजैसे जैसे bacteria के द्वारा oxidized होते जाते हैं वैसे वैसे waste का colour black होता जाता है इससे हम ये बोल सकते हैं कि waste water पुराना है।

  • Odour

Odour का main reason organic matter का decomposition होना है, सबसे ज्यादा familiar odour hydrogen sulphide की है जो कि anaerobic microorganism बनाता है sulfateतो sulphide में reduce करके।

  • Temperature

Waste water को हम sewage भी बोलते हैं, India में sewage का temperature 20℃को standard  माना गया है जो कि biological activities के होने के लिए ideal temperature है।

Chemical characteristics

1) Total solids, suspended solids, and settleable solids

Waste water में solids चार form में पाए जाते हैं।

Suspended solids, dissolved solids,colloidal एंड settleable solid

Suspended solid वो होते हैं जो पानी मे तैरते रहते हैं।

Dissolved solids वो होते हैं जो पानी मे घुल जाते हैं|

Colloidal solids बहुत ही छोटे solid होते हैं और वो या तो suspension में रहते हैं या फिर solution में।

Settleable solids वो होते हैं जिन्हें अगर imhoff cone में 2 hrs के लिए छोड़ दिया जाए तो वो नीचे settle हो जाते हैं।

Imhoff cone

Waste water में solid या तो organic या inorganic टाइप के होते हैं, total solids में organic solid 45% और inorganic solid 55% होते हैं।

2) PH- PH का determination बहुत important होता है यही हमे बताता है कि हमे कौनसे treatment देने हैं जो कि pH dependent है।PH निकलने वाले instrument को हम potentiometer कहते हैं।जब sewage fresh होता है तो वह alkaline होता है पर धीरे धीरे oxidation होने के साथ वो acidic हो जाता है और brown color में change हो जाता है।

3) Chloride content- ये ज्यादातर kitchen, bathroom, toilet से निकलने वाले waste की वजह से होती है।chloride की sewage में normal content 120mg/l तक limit है इससे ज्यादा होना हमारे लिए सही नही है।chloride की amount का जरूरत से ज्यादा होना हमे यह बताता है कि आने वाले sewage में कही industry के waste का contamination हुआ है क्योंकि industry से निकलते वाले waste में chemicals की मात्रा ज्यादा होती है।

Chloride को हम titration से निकल सकते हैं, waste water के sample को standard silver nitrate solution के साथ titration करते हैं जिसमे potassium chromate को हम एक indicator की तरह use करते हैं।

4) Nitrogen content- Nitrogen का waste water में होना ये बताता है कि waste में organic matter present है।nitrogen हमे अलग अलग रूप में मिल सकती है और हम रूप का मतलब waste में pollution का indication होता है।हम जानते हैं जब कोई organic matter जैसे urinal  से आया waste ammonia release करता है और ये ammoniaका oxidationहोके एक unstable compound बनता है जिसे हम nitrite के नाम से जानते हैं , ये nitrite फिरसे Oxidizeहोक nitrate बनाता है जो कि stable होता है और जहाँ एक बार nitrification होती है वह denitrification भी होती है तो denitrification में nitrogen गैस का evolution होगा जो कि एक water stream में nitrogen की amount को बढ़ा देगी।

Free ammonia हमें बताता है कि pollution हालही का है।

Albuminoid nitrogen or organic nitrogen हमे decomposition से पहले nitrogen की मात्रा बताती है।

Nitrites हमे incomplete decomposition के बारे में बताता है।

Nitrate हमे old pollution के बारे में बताता है कि मतलब एक stream में पहले pollution हुआ था nitrogen से पर अब नार्मल है उसकी amount।

Sulphides, sulphates and hydrogen sulphide gas की presence

Sulphur containing compoundsके decomposition से sulphides ओर sulphate बनते हैं।इस decomposition से hydrogen sulphide gas भी निकलती है जो बहुत ज्यादा smell produce करती है, उसकी स्मेल rotten egg की तरह होती है जो हमे बता देती है कि stream में sulphur present है, hydrogen sulphide gas concrete के pipes में corrosion भी करती है इसलिए ये ज्यादा खतरनाक होती है।

Dissolved oxygen

पानी मे oxygen का सही मात्रा में होना बहुत जरूरी है यही aerobic microorganism ओर दूसरे aquatic animals को ज़िंदा रखने में मदद करता है।पानी मे ऑक्सीजन की मात्रा बहुत हद तक temperature पर भी निर्भर करती है, अगर temperature ज्यादा होगा तो पानी मे ऑक्सीजन कम होगी,ओर temperature के कम होने से ऑक्सीजन ज्यादा होती है।किसी भी समय पानी मे घुली हुई ऑक्सीजन का 4 ppm से कम होना fish ओर दूसरे aquatic animal के मरने का कारण भी बनता है तो Indian standard के हिसाब से पानी मे किसी भी समय पानी मे घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा 4 ppm से ज्यादा ही होनी चाहिए नही तो ecological imbalance शुरू हो जाएगा।

पानी मे ऑक्सीजन कितनी घुली है इसे हम Winklers method से निकलते हैं।

Chemical oxygen demand(COD)

पानी मे आर्गेनिक matter दो तरह से present रहता है –

  • Biodegradable organic matter
  • Non biodegradable matter

Biodegradable organic matter वो होते हैं जो समय के साथ microorganism के action की वजह या फिर decomposition की वजह से oxidize हो जाते हैं पर non biodegradable matter oxidize नहीं हो पाते।Biodegradable  ऑर्गेनिक मैटर को decompose कराने के लिए जो ऑक्सीजन की जरूरत होती है उसे हम बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD),बोलते हैं और जो बायोडिग्रेडेबल और साथ में नॉन बायोडिग्रेडेबल दोनों को डीकंपोज कराने के लिए जितनीoxygen की जरूरत होती है उसे हम केमिकल ऑक्सीजन डिमांड या फिर COD बोलते हैं।

COD को निकालने के लिए हम potassium dichromate test का उसे करते हैं।

Theoretical oxygen demand (ThOD)

अगर हमें पानी में मौजूद सभी ऑर्गेनिक मैटर की सही मात्रा और उसका केमिकल फार्मूला पता हो तो हम उसे ऑक्सिडाइज होने के लिए कितना ऑक्सीजन चाहिए यह पता लगा सकते हैं जिसे हम Theoretical oxygen demandसे जानते हैं।

Total organic carbon

पानी में मौजूदwaste organic matter को हम कार्बन कंटेंट में डिनोट करते हैं अगर हमें पानी में मौजूद सभी ऑर्गेनिक मैटर का केमिकल फार्मूला पता हो तो हम उसे एक कार्बन के यूनिट में कन्वर्ट कर सकते हैं, जिसे हम टोटल ऑर्गेनिक कार्बन बोलते हैं ऐसा करने से हमें उसको डीकंपोज होने के लिए कितना ऑक्सीजन चाहिए और भी अलग केमिकल रिक्वायरमेंट का पता लगा सकते हैं बस उसकी केमिकल रिएक्शन करा कर।

Biochemical oxygen demand (BOD)

Bio chemical oxygen demand एक quantity ऑफ oxygen है जो हमे पानी मे मौजूद organic matter को aerobically decompose करने के लिए require होती है।इसकी requirement basically इन 3 चीजों के द्वारा पर depend करती है-

  • पानी मे carbonaceous organic materials कितने हैं, ये ऐसे materials होते हैं जो biodegradable organic matter को oxygen की presence में aerobically decompose कर देते हैं।
  • हम जानते हैं कि nitrification ओर denitrification में फ्री nitrogen release होती है और ये free nitrogen microorganism के द्वारा oxygen की presence में absorb कर ली जाती है, इससे oxidisable nitrogen जो भी nitrite,ammonia ओर other nitrogen products में रहती है उसे decompose करने के लिए भी oxygen की requirement है तो ये भी BOD में कैलकुलेट होगी।
  • कुछ metals जैसे iron, sulfide खुद ऑक्सीजन लेके reduce हो जाते हैं तो ये भी oxygen की demand को बढ़ाने में contribute करते हैं।

BOD निकलने के लिए किए जाने वाला test

Dilution test- हम waste water के एक सैंपल को aerated source ऑफ water या फिर जिसे हम साफ पानी जिसमे कोई गंदगी नही है ओर जिसमे पर्याप्त मात्रा में oxygen dissolve है उससे mix कर देते हैं ,अब दोस्तो बात ये है कि waste water के source वाले पानी मे तो dissolve oxygen बहुत कम या फिर बिल्कुल नही होगी, ये उस waste water के pollution पर निर्भर करता है।तो जब हम इन दोनों sample को मिलाके एक सैंपल बनाते हैं तो उसकी volume हम 300ml रखते हैं, ओर जिस बोतल में हम इस सैंपल को रखते हैं उसे हम BOD बोतल भी बोलते हैं, अब इसके बाद हम इस मिक्स वाले सैंपल को 5 दिन के लिए 20℃ पर रखते हैं, sunlight से दूर, क्योंकि अगर sunlight या खुले में रखेंगे तो उसमें ऑक्सीजन बड  जाएगी।उसके बाद हम 5 दिन के बाद वाले सैंपल को लेके उसकी dissolved oxygen चेक करते हैं ,अगर उसमे इसके बाद भी oxygen रहती है तो waste water में गंदगी कम है और अगर नही तो waste water में गंदगी बहुत ज्यादा है।

First stage BOD और second stage BOD क्या है?

BOD curve

ऑक्सीजन की पहली demand organic matter के decomposition के लिए होती है जिसे हम carbonaceous demand या फिर first stage BOD भी कहते हैं।इसके बाद लगभग 5-8 दिनों के बाद पानी मे मोजूद nitrogenous compound’sका decompositionहोने लगता है उसके लिए जो ऑक्सीजन की जरूरत होती है उसे हम second stage BOD या nitrogenous demand कहते हैं।

Nitrogenous demand लगभग 5-8 दिनों के बाद start होती है क्योंकि उसकी reproduction rate बहुत स्लो होती है।

Autotrophs bacteria और hetrotrophs bacteria क्या होते हैं?

Nitrification bacteria ही autotrophs बैक्टीरिया होते हैं, जो अपनी ग्रोथ के लिए जरूरी carbon complex compoundको breakकरके लेते हैं मतलब इन्हें अपने खाने के लिए अपनी energy खर्च करनी पड़ती है इसलिए ये 5-8 दिन के बाद अपना असर दिखाते हैं।जबकि दूसरी तरफ है hetrotrophs ये अपनी growth के लिए carbon सीधे organic matter से ही ले लेते हैं इसलिए ये जल्दी grow करते हैं।

Reaction kinetics

Reaction kinetics

Lt=किसी टाइम t के बाद मौजूद आर्गेनिक matter।

L०=saturated BOD

Kd=reaction constant

T=Temperature

Population equivalent क्या है?

Treatment plant government लगाती है ,तो वो इस गंदगी को करने वालो से government charge भी करती है लेकिन इस गंदगी को करने वाले तो दोस्तो municipal में आने वाले घर और industry है लेकिन industry तो घर की तुलना में ज्यादा pollution करेगी तो उसे चार्ज भी ज्यादा देना होगा, तो हम industry के द्वारा की गई गंदगी को इंसानों को द्वारा गंदगी से तुलना करते हैं और फिर जितने इंसानो के द्वारा किये गए waste industry के waste से मिलती है गवर्नमेंट फिर उस industry से उतना ही पैसा चार्ज करती है।

Average standard BOD domestic sewage की 80gm per person per day है।

एक दिन में एक इंसान लगभव 80gm BOD contribute करता है bod के फॉर्म में तो इसी डेटा को लेके हम industry से चार्ज लेते हैं।

Relative stability

इसमे हम sewage को एक solution से मिक्स करते हैं जो हैं methylene blue solution, इससे पूरा waste blue colour में हो जाता है अब इस वास्ते को 20℃ या 37℃ पर रखते हैं जिससे micro organism organic matter को decompose करदे ओर इसका colour भी धीरे धीरे आर्गेनिक matter के खत्म होने से कम होता जाता है, ओर अगर 4 दिन के बाद भी इस sewage में blue colour रहता है तो इसका मतलब होता है कि sewage में ऑक्सीजन अभी भी है और उनके सारे आर्गेनिक matter खत्म हो गए हैं ऐसे sewage को हम stable sewage बोलते हैं।ओर अगर sewage का colour खत्म हो जाता है 4 दिन के बाद तो वो unstable होता है ऐसे effluent को हम फिरसे treat होने के लिए भेज देते हैं।


तो दोस्तों इस तरह से हमारा आज का यह टॉपिक खत्म होता है। आशा करता हू आज आपके waste water characteristics से जुड़े कई सवालो के जवाब मिल गए होंगे। अगर आपके अभी भी कोई सवाल इंजीनियरिंग से जुड़े है, तो आप हमे कमेन्ट करके जरूर बताये।

इंजीनियरिंग दोस्त (Engineering Dost) से जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद 🙂

 

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Aayush Sharma is an Assistant Engineer in a Semi-Government Company and Owner of "Engineering Dost" and the Electrical Dost YouTube Channel. He Provides you Engineering inquiry and support of engineering market facts with Practical experience.

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