Irrigation क्या है और इसको apply करने के methods?

नमस्कार दोस्तो आज का हमारा टॉपिक Irrigation of soil है। इसमे हम पढेंगे कि irrigation क्या होता है, इसके फायदे क्या क्या है, ये कब करना चाहिए और कितना करना चाहिए।

Irrigation एक बहुत ही important टॉपिक है civil engineering का, ये subject हमेशा से students के लिए scoring ओर easy होता है। तो आईये शुरू करते हैं, आज का Irrigation और उसके methods का topic

Plants को पानी और हवा की जरूरत होती है जीने के लिए। अलग अलग plants में ये पानी और हवा की जरूरत अलग अलग हो सकती है, अलग अलग time पर जब तक कि वो बड़े न हो जाये।

Irrigation kya hai hindi

इन पौधो में पानी या तो बारिश से दिया जाता है या फिर river या man made structure से। आज के time में बारिश हर जगह enough नई होती तो हमे पौधों के विकास के लिए बहुत ज्यादा man made sources जैसे tube well पर निर्भर रहना पड़ता है। irrigation एक science है जिसमे पौधों को सही मात्रा में पानी दिया जाता है,जिससे उनकी growth अच्छे से हो सके।

Irrigation की जरूरत क्यों है?

Irrigation की जरूरत हमे इसलिए है क्योंकि-

#बारिश का पानी पर्याप्त नई होता।

#हर जगह बारिश एक जैसी नई होती।

#फसल की productivity बढ़ाने के लिए।

#सूखे से safeguard करने के लिए।

Irrigation के फायदे ओर नुकसा

Irrigation के benefit (फायदे)

  • फसल की पैदावार अच्छी हो जाती है।
  • सूखे से निज़ात मिल जाती है।
  • cultivator revenue generate करती है।
  • बड़े river valley project बनाये जाते हैं जिससे कि hydroelectric power का generation हो सके। जो कि government के लिए भी बहुत उपयोगी होता है और इसके साथ साथ ये लोगो को electricity भी provide कराता है।
  • ऐसे बड़े projects यातायात के काम भी आते हैं क्योंकि water transportation सबसे सस्ता और फायदा पहुचाने वाला यातायात है।
  • ये projects बड़ी मात्रा में रोजगार भी उपलब्ध कराता है।

Irrigation के नुकसान

ज्यादा पानी देने से soil की गुणवत्ता कम होती है और साथ ही पानी भर जाता है इसे हम water logging कहते हैं।

ज्यादा पानी देने से seepage से जब पानी नीचे जाएगा तो वो अपने साथ बहुत chemicals भी लेके जाएगा जिससे वो ground water को भी polluted करेगा।

ज्यादा पानी देने से एक cold ओर damp atmosphere बनता है जो dengue ओर malaria के मच्छर पैदा करता है।

Irrigation के Types

  1. surface irrigation
  2. subsurface irrigation

Surface irrigation- इसके अंदर पानी या तो gravity या फ़िर pump करके पहुचाया जाता है। ऐसी soil जिसकी infiltration capacity कम है ये technique वहाँ use की जाती है क्योंकि ऐसे में पानी कम ही loss होगा नीचे seepage के फॉर्म में।

Surface irrigation को भी 2 भागों में बांटा गया है।

  1. Flow irrigation
  2. Lift irrigation

जब पानी एक height ओर रहता है तो किसी pump के उपयोग के बिना ही हम उसे जरूरत की जगह पर पहुच सकते हैं,जब पानी gravity से पहुचाया जाता है तो इसे हम flow irrigation कहते हैं।

जब पानी well या tube well से पहुचाया जाता है तो उसे हम lift irrigation कहते हैं।

Perennial irrigation- ये irrigation का ऐसा system है जिसमे पूरी साल पानी रहता है और इसे हम direct apply भी कर सकते हैं और store भी करते हैं।

Flood irrigation- ये एक ऐसा system है जिसमे पानी जब ज्यादा आता है तो उसे store करके बाद में use में लाते है। इसे हम uncontrolled irrigation या inundation irrigation भी बोलते हैं।

Sub surface irrigation- इस method में पानी surface के बजाय plant की root को nourish करता है, capillary से।

Methods of irrigation

1) free flooding or ordinary flooding

इसमे गड्डे खोदकर उससे sub ditch निकलते हैं, इस method की efficiency बहुत कम होती है।ये मेथड उन crops के लिए बहुत useful है जो पास पास लगती हैं।जैसे-pasture(चारा)

free flooding or ordinary flooding

इस method को rolling ground पर अच्छे से use कर सकते हैं।

2) Border flooding

इस method में land को number of strips में divide करते हैं,जो कि छोटे उठे हुए border से आपस मे अलग होते हैं।

हर strip की length (100-400)m होती है और उसकी width (10-20)m होती है।

Border flooding

ये method सबसे ज्यादा popular है। इस method में होने वाले loss ज्यादा होते हैं क्योंकि ये atmosphere के संपर्क में रहता है, इसलिये इस method की efficiency कम होती है।

Border flooding

Border flooding Equation

Q=discharge

y=depth of water

f=rate of infiltration

T=time required to cover area A

A=area of land

3) check flooding

ये method ordinary flooding जैसा ही है बस इसमे एक अलग बात ये है कि इसमें area flat मिट्टी से बनाये गए leaves से अलग होता है।

check flooding

ऐसे फसल जो पास में लगती हैं जैसे jowar, paddy उनके लिए ये method बहुत अच्छा है।

4) Basin flooding

ये method orchards (बाग़ान)के लिए उसे किया जाता है।

Basin flooding

इसमे बेसिन बनाये जाते हैं जो कि square, rectangle, circular या irregular भी हो सकते हैं।coarse soil पर ये ज्यादा सही नई रहता क्योंकि उसकी permeabilityज्यादा होती है तो plant को पानी मिलने से पहले  ही पानी का एक बहुत ज्यादा amount loss हो जाएगा।

 5) furrow irrigation

furrow irrigation

furrow irrigation hindi

इस method में पानी को furrows बनाके apply करते हैं, furrows एक तरह की नाली होती है।इन नाली के ऊपर जहा मिट्टी ज्यादा है वहाँ plant लगाए जाते हैं।

इसको apply करने की range बहुत wide है, ये लगभग सभी तरह की soil में लग जाती है।

6) sprinkler irrigation method

इस method में पानी को land के ऊपरspray किया जाता है, एक artificially बारिश कराई जाती है।ये उन soil पर किया जाता है जहाँ की soil rolling ground पर हो या उसका स्लोप steep हो।इसको लगाने में खर्च भी बहुत आता है और इस method की efficiency बहुत ज्यादा होती है। ये method से ज्यादातर cash crops को irrigate करने के लिए उपयोग किया जाता है।

sprinkler irrigation method

इस method में हम एक pump का use करते हैं जो पानी को बाहर फेकने में use होता है। इस method में हम पानी मे मिलने वाले fertilizer ओर pesticide को पानी मे मिलाके भी apply कर सकते हैं। जैसे- चाय के बागान, तंबाकू।

7) Drip irrigation method

इस मेथड में पानी की pipes को जमीन के नीचे से पूरे land पर बिछाया जाता है जिससे जमीन के ऊपर तो पानी apply होते हुए नई दिखता पर जमीन के नीचे बिछाये गए pipes में छेद होते हैं जिससे पूरे land को irrigate किया जाता है।इस Method को trickle irrigation भी बोलते हैं क्योंकि इसमें पानी trickle होते हुए जाता है।

ये मेथड बहुत महंगा है इसे हर type की soil में नहीं लगाया जा सकता,अगर हम land पर fertilizer ओर pesticide का use करना है तो उसे हम पानी मे गोलकर सीधे plant की जड़ में पहुँचा सकते हैं।इस method में loss सबसे कम होता है।

इससे लगाई जाने वाली फसल है- टोमेटो, cauliflower, grapes etc

इससे पानी मे होने वाले losses सबसे कम होते हैं। इसलिए इस method की efficiency सबसे ज्यादा होती है।

इस method में पानी को apply करने के लिए बाहर से energy देनी पड़ती है और वो हम देते हैं, एक pump लगाकर जो इस पानी को land तक पहुचाता है।

इस मेथड में पानी का evaporation से होने वालाloss बहुत ही कम होता है क्योंकि पानी atmosphere के संपर्क में बहुत कम आता है।


तो दोस्तों इस तरह से हमारा आज का यह टॉपिक खत्म होता है। आशा करता हू आज आपके Irrigation से जुड़े कई सवालो के जवाब मिल गए होंगे। अगर आपके अभी भी कोई सवाल इंजीनियरिंग से जुड़े है, तो आप हमे कमेन्ट करके जरूर बताये।

इंजीनियरिंग दोस्त (Engineering Dost) से जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद 🙂

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