फैन में दो वाइंडिंग क्यों की जाती है?

2
why two windings used in fan hindi

आज की हमारी पोस्ट का टॉपिक है की फैन(fan) के अंदर दो वाइंडिंग क्यों होती है? दोस्तों यह टॉपिक इलेक्ट्रिकल से जुड़े हुए लोगो के लिए काफी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है, क्योकि यह सवाल काफी बेसिक है, और इलेक्ट्रिकल इंटरव्यू के लिए भी काफी इम्पोर्टेन्ट है।

क्युकी जब भी हमारी मोटर की बात आती है, तो सबसे ज्यादा इस्तेमाल हमारी सीलिंग फैन की मोटर का ही होता है। तो अब इससे ही जुड़ा एक सवाल यह आ जाता है, की आखिर हमारे सीलिंग फैन के अंदर दो वाइंडिंग क्यों की जाती है?

Which winding is inside the fan ?

फैन के अंदर कौन-कौनसी वाइंडिंग होती है ?

जैसा की आप निचे फोटो में देख सकते है की पहली वाइंडिंग बाहर वाली और हमारी दूसरी वाइंडिंग अंदर की और की गयी है।

fan main winding

सबसे पहले जब हम हमारे सीलिंग फैन की वाइंडिंग की बात करते है तो उसमे बाहर वाली वाइंडिंग को हम लोग मैन वाइंडिंग कहते है। जो हमारा मैन काम होता है वो इस मैन वाइंडिंग का होता है। और जो अंदर वाली वाइंडिंग होती है वो हमारी ऑक्सिलरी वाइंडिंग होती है, कई बार हम इसको स्टार्टिंग वाइंडिंग भी बोलते है। और मैन वाइंडिंग को हम रनिंग वाइंडिंग भी बोलते है। तो अब हम लोग दोनों वाइंडिंग को एक एक करके समझ लेते है।

What is working of main winding in motor ?

मैन वाइंडिंग का क्या काम होता है ? 

जैसा की हमने देखा की हमारी अंदर वाली वाइंडिंग ऑक्सिलरी वाइंडिंग और बाहर वाली वाइंडिंग मैन वाइंडिंग होती है। तो जैसा की इनके नाम से से ही पता चलता है की इनका क्या काम है। मैन वाइंडिंग के नाम से हमे पता चलता है की यह हमारी मुख्य वाइंडिंग है यानि की यही हमारी मोटर को चला रही है।

winding in motor

लेकिन दूसरी वाइंडिंग है ऑक्सिलरी जिसका मतलब होता है सहायक यानी की यह हमारे मोटर के चलने में सहायक है मतलब की मोटर को चलने में मद्त कर रही है, लेकिन वही मोटर को चलाने का काम हमारी मैन वाइंडिंग करती है।

तो दोस्तों अब तक हमे यह तो समझ आ गया की हमारी बाहर वाली मैन वाइंडिंग है, तो दोस्तों अब सवाल यह उठता है की अगर हमारी बाहर वाली मैन वाइंडिंग है तो हम अंदर की वाइंडिंग का उपयोग क्यों करते है, अंदर की वाइंडिंग को हटा देते, और सिर्फ बाहर वाली वाइंडिंग को सिंगल फेज में न्यूट्रल और फेज देकर चला लेते तो ऐसा क्यों नहीं करते?

What is use of auxiliary winding in motor ?

सहायक (auxiliary) वाइंडिंग का क्या काम होता है ?  

तो दोस्तों इसका जवाब काफी ज्यादा आसान है लेकिन आपको यह ध्यान रखना है की सिर्फ हमारा सीलिंग फैन ही नहीं बल्कि जितनी भी सिंगल फेज की इंडक्शन मोटर होती है सभी के अंदर हमारी दो वाइंडिंग होती है। ऐसी कोई भी मोटर नहीं आती जिसके अंदर 1 फेज सप्लाई आती हो और केवल एक ही वाइंडिंग हो, जितनी भी 1 फेज की मोटर होती है उन सब में दो वाइंडिंग की जाती है।

अब सवाल यह आता है की 1 फेज मोटर के अंदर आखिर दो वाइंडिंग क्यों की जाती है तो दोस्तों इनका जवाब एक ही है। आपको बस यह पता होना चाहिए की जब हमने स्लिंग फैन या फिर किसी भी मोटर के अंदर एक वाइंडिंग की है और इस वाइंडिंग से हमने एक फेज और एक न्यूट्रल की सप्लाई दी। तो ऐसा करने के कारण हमारी जो मोटर के अंदर रोटर होता है (रोटर हम उसे बोलते है जो घूमता है)। तो अभी के केस में जब हमने मोटर में केवल एक ही मैन वाइंडिंग की और इसके अंदर फेज और न्यूट्रल दिया तो इसके कारण दोस्तों हमारे रोटर के ऊपर bidirectional टार्क लगता है। आखिर यह टार्क क्या होता है।

टार्क का एक सिंपल सा मतलब होता है धक्का लगना। मतलब एक तरह का प्रेशर लगना। जब हमारी वाइंडिंग के अंदर करंट फ्लो होता है तो उसके अंदर मैगनेटिक फिल्ड उतपन हो जाता है। और यह जो मैगनेटिक फिल्ड होती है यह हमारी मोटर को धक्का लगाने का काम करती है। मतलब टेक्नीकल भाषा में हमारे रोटर के ऊपर टार्क लगाता है। लेकिन अभी जो हमारा टार्क लगेगा वो होता है हमारा bidirectional. आपको बस इस सवाल का इतना सा याद रखना है की 1phase मोटर में अगर एक ही मैन वाइंडिंग उपयोग हो रही है तो उस पर bidirectional टार्क लगता है।

bidirectional टार्क का मतलब होता है दोस्तों हमारे रोटर पर जो धक्का लगेगा वो हमारे एक समय पर ऊपर की तरफ लगेगा और निचे की तरफ दोनों तरफ एक साथ धक्का लगेगा। मतलब की हमारी जो मोटर होगी वो स्लिंग फैन को एक बार ऊपर घूमना चाहेगी और एक बार निचे की तरफ घुमाना चाहेगी। मतलब कभी ऊपर धक्का लगेगा कभी ऊपर धक्का लगेगा।

torque on rotor

तो ऐसे धक्का लगने से क्या होगा की हमारी मोटर घूम ही नहीं पाएगी। क्योकि यह जो bidirectional  टार्क लगता है सिंगल फेज मोटर के अंदर यह हमारी 50Hz frequency. से लगता है यानि की 10 मिली सेकंड के अंदर बार बार धक्का लगता है। मतलब की 10 मिली सेकंड के लिए ऊपर की तरफ और 10 मिली सेकंड के लिए निचे की तरफ धक्का लगता है।

ac supply

तो इसके कारण हमारी जो मोटर होती है वो एक ही जगह कम्पन करती रहती है। तो अब सवाल आता है की आखिर 2 वाइंडिंग क्यों की जाती है।

दोस्तों 2 वाइंडिंग का लगाने का कारण सिंपल सा है की जो हमारी बाहर वाली वाइंडिंग है जिसे मैन वाइंडिंग बोलते है उसके ऊपर एक और वाइंडिंग लगा देते है जिसे हमे ऑक्सिलरी यानि की सहायक वाइंडिंग कहते है। इसका एक और नाम होता है वो है स्टार्टिंग वाइंडिंग क्योकि यह मोटर  स्टार्ट करने में मद्त करती है।

fan windings diagram

दोस्तों यह जो दूसरी वाइंडिंग होती है इसके साथ सीरीज में हम लोग एक कपैसिटर भी लगा देते है। आपने सीलिंग फैन में 2.5 mF का कपैसिटर लगा हुआ तो जरूर देखा होगा है। 1 फेज से तो हमारी मोटर घूम नहीं रही थी अब हमने क्या किया की हमने एक और सहायक वाइंडिंग लगा दी।

तो ऐसा करने से क्या हुआ की जब भी हमने हमारी मोटर  को सिंगल फेज की सप्लाई दी तो ऐसा करने से यह हुआ की जो हमारी मोटर पर टार्क लग रहा है वह bidirectional नहीं लग रहा। इस केस में जो हमारा टार्क लगेगा वो unidirectional होगा। यानि की मोटर पर जो धक्का लग  केवल एक ही दिशा में लगेगा।

तो दोस्तों इसके लिए आपको इंटरव्यू के अंदर दो लाइन बोलनी है की हमारे सेल्लिंग फैन ही नहीं बल्कि हमारी जितनी भी 1 फेज की मोटर होती है उन सभी के अंदर 2 वाइंडिंग होती है। ऐसा इस वजह से करते है क्योकि जब हमारे पास में केवल एक ही वाइंडिंग होती है और उसको हम फेज और न्यूट्रल और फेज की सप्लाई देते है तो उसमे bidirectional टार्क लगता है। जिससे मोटर घूमती नहीं है और एक ही जगह पर कम्पन है। तो इसके लिए हम एक और वाइंडिंग करते है जिसे ऑक्सिलरी या सहायक वाइंडिंग कहते है और इस वाइंडिंग के सीरीज में एक कपैसिटर को जोड़ देते है और ऐसा करने से जो टार्क लगता है वो unidirectional होता है यानी की टार्क एक ही दिशा में लगता है जिससे मोटर घूमने लग जाता है।

what is difference between main winding and auxiliary winding ?

मैन वाइंडिंग और सहायक वाइंडिंग में क्या अंतर है ? 

  1. दोस्तों हमारी मैन वाइंडिंग ही फ्लक्स प्रोडूस करती है, जबकि हमारी सहायक वाइंडिंग केवल मोटर को घुमाने में सहायकता करती है
  2. मैन वाइंडिंग के घेरे (turns) ज्यादा होते है, जबकि सहायक वाइंडिंग के कम घेरे होते है।
  3. मैन वाइनडिंग्स के घेरे बड़े होते है, जबकि सहायक वाइंडिंग के  घेरे छोटे होते है।
  4. मैन वाइंडिंग और सहायक वाइंडिंग आपस में 90′ इलेक्ट्रिकल एंगल पर होती है।

उम्मीद है की दोस्तों आपको आपके सारे सवालों के जवाब मिल गए होंगे लेकिन अगर फिर भी कोई सवाल रह गया हो तो कमेंट में पूछ सकते है या फिर आप अपना सवाल हमे इंस्टाग्राम पर भी बेज सकते है। (Click Here).

दोस्तों अगर आप  इलेक्ट्रिकल की वीडियो देखना पसंद करते है तो आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते है।  “Electrical Dost”  (click Here).

Thank You.

पिछला लेखWhat are the types of the fan in Hindi
अगला लेखमोटर जनरेटर और अल्टरनेटर में क्या अंतर होता है?
Aayush Sharma is an Assistant Engineer in a Semi-Government Company and Owner of "Engineering Dost" and the Electrical Dost YouTube Channel. He Provides you Engineering inquiry and support of engineering market facts with Practical experience.

2 टिप्पणी

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें