Earthing and Grounding difference in hindi

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दोस्तों अगर आप इलेक्ट्रिकल में पढ़ाई या फिर जॉब करते है। तो आपने earthing और grounding इन दोनों शब्दों को जरूर सुना होगा, और तब आपने यह सोचा भी होगा की आखिर अर्थिंग और ग्राउंडिंग क्या होती है, और earthing and grounding में क्या अंतर होता है।

तो आज हम आपको सबसे पहले Earthing Grounding क्या होता है यह बताएँगे। इसके बाद इन दोनो के बीच अन्तर को समझा देंगे।

सबसे पहले आपको यह याद रखना है की, अर्थिंग और ग्राउंडिंग दोनो ही एक तरह से ही की जाती है। मतलब दोनो के अंदर ही जमीन में गहरा खड्डा करके उसमे से एक वायर को निकाल लिया जाता है।

लेकिन अब हम जमीन से निकाले गए इस वायर को किस जगह पर जोड़ रहे है, उससे फर्क पड़ता है की वह earthing कहलाएगी या फिर Grounding.

What is Earthing (अर्थिंग क्या होती है)

Earthing के अंदर सबसे पहले हम जमीन के अंदर एक गहरे खड्ढे को करके वहाँ से एक वायर को निकाल लेते है। अब इस वायर को हम हमारे इलेक्ट्रिकल के उपकरण की बॉडी पर जोड़ देते है।

यह अर्थिंग वायर को उस उपकरण पर जोड़ा जाता है, जिसकी बॉडी मेटल की बनी होती है। क्योंकि मेटल से बनी बॉडी पर करंट आसानी से फ्लो हो जाता है।

अर्थिंग की जरूरत- अर्थिंग करने के बाद अगर कभी किसी कारण से सप्लाई वायर उपकरण की बॉडी के भीड़ जाता है। तो उस समय करंट हमारे अर्थ वायर की मदद से जमीन के अंदर जाने लग जाएगा। इस बीच अगर कोई उपकरण की बॉडी को आकर छूता भी है, तो उसको करंट नही लगता है।

What is Grounding (ग्राउंडिंग क्या होती है)

Grounding के अंदर भी अर्थिंग की तरह सबसे पहले जमीन में खड्डा करके एक वायर को बाहर निकाल लिया जाता है। पर ग्राउंडिंग के समय हम इस वायर को उपकरण की बॉडी से नही जोड़ते है।

Grounding के समय हम अर्थ के वायर को लाइव सप्लाई के न्यूट्रल से जोड़ते है। ग्राउंडिंग का उपयोग बेहतर तरीके से करंट को जाने का रास्ता मिल जाए इसके लिए किया जाता है।


Earthing and Grounding Difference

Earthing- Earthing is used for our safety when we have an electrical fault.

● अर्थिंग का उपयोग इलेक्ट्रिकल फाल्ट के होने पर, हमारी सेफ्टी के लिए किया जाता है।

Grounding- Grounding is used for the safety of electrical equipment when we have an electrical fault.

● ग्राउंडिंग का उपयोग इलेक्ट्रिकल फाल्ट के होने पर, इलेक्ट्रिकल के उपकरण की सेफ्टी के लिए किया जाता है।


अर्थिंग और ग्राउंडिंग में अंतर

अर्थिंग-और-ग्राउंडिंग-में-अंतर

  • अर्थिंग में हम उपकरण की बॉडी और जमीन को आपस में जोड़ते है। लेकिन ग्राउंडिंग के समय हम इलेक्ट्रिकल सर्किट के न्यूट्रल को जमीन से जोड़ते है।
  • ग्राउंडिंग के लिए अधिकतर काले रंग के तार का उपयोग किया जाता है। और अर्थिंग के लिए हरे रंग के तार का उपयोग किया जाता है, 
  • Earthing का उपयोग इलेक्ट्रिकल शॉक से बचने के लिए किया जाता है। लेकिन ग्राउंडिंग का मुख्य उपयोग थ्री फेज इलेक्ट्रिकल सिस्टम को unbalance होने से बचाने के लिए किया जाता है।
  • Grounding के अंदर लाइव पार्ट जिसमे करंट बह रहा है उसको जमीन से जोड़ा जाता है। लेकिन Earthing के समय Dead part को जमीन से जोड़ा जाता है। मतलब उस पार्ट को, जो की नॉर्मल कंडीशन में करंट के सम्पर्क में नही होता है।

उदाहरण- ट्रांसफॉर्मर और जनरेटर के न्यूट्रल मतलब (स्टार कनेक्शन) को हम जमीन से ground कर देते है। इसी को ही ग्राउंडिंग कहा जाता है।

जबकि जब हम ट्रांसफार्मर या किसी भी उपकरण जिसकी बॉडी मेटल की बनी है। उसको हम अपनी इलेक्ट्रिकल शॉक से सुरक्षा के लिए जमीन से जोड़ते है, यह अर्थिंग कहलाती है।

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तो दोस्तो उम्मीद है, आज आपके Earthing और Grounding से जुड़े कई सवालो के जवाब मिल गए होंगे। अगर आपके अभी भी कोई सवाल इंजीनियरिंग से जुड़े है, तो आप हमे कमेन्ट करके जरूर बताये।

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Aayush Sharma is an Assistant Engineer in a Semi-Government Company and Owner of "Engineering Dost" and the Electrical Dost YouTube Channel. He Provides you Engineering inquiry and support of engineering market facts with Practical experience.

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